प्रेम आजकल (वैलेंटाइन स्पेशल)प्रेम प्रेम हर कोई करेप्रेम करे न कोयपर्स जो खाली रहे कभीपास न कोई होय lबैक बैलेंस को देखकरजो रिश्तों को ढोएचार दिनों की चांदनीफिर अंधियारा होय lसमय बड़ा अनमोल हैव्यर्थ न इसको गंवाप्रेम रोग जो लग जाएमिले न कोई दवा lवेलेंटाइन डे के नाम परमची गंद चहूं ओरऐसी काली रात है येजिसकी न होती भोरअपनी सनातन संस्कृतिचले हैं पीछे छोड़पश्चिमी फैशन को लिएलगा रहे सब दौड़- सुभाष

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